Monday, 3 March 2014

प्रधानमंत्री और जन लोकपाल

प्रधानमंत्री और जन लोकपाल


जो भ्रांतियां इस कानून के खिलाफ फैलाई जा रही हैं, उसमें एक चीज यह कही जा रही है कि प्रधानमंत्री को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाये। प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच करने की पावर लोकपाल को न दिया जाए। 

ये कहा जा रहा है कि अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ लोकपाल जांच करेगा तो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम बदनाम होगा। ये कहा जा रहा है कि अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ लोकपाल जांच करेगा तो हमारे जनतन्त्र का खतरा पैदा हो सकता है।

सवाल ये है कि अगर हमारे देश में कोई भ्रष्ट प्रधानमंत्री है तो इससे बड़ा भारत के लिए धब्बा कोई नहीं हो सकता। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के ऊपर अगर भ्रष्ट प्रधानमंत्री के खिलाफ भारत सख्त कार्रवाई करता है तो भारत के प्रतिष्ठा बढ़ेगी। लेकिन उसके भ्रष्टाचार को भारत सहन करता है तो भारत की बदनामी चारों तरफ होगी। 

दूसरी बात, एक भ्रष्ट प्रधानमंत्री हमारे देश के लिए, हमारे जनतन्त्र के लिए, हमारी सिक्योरिटी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। तो सबसे बड़ा खतरा क्या है? भ्रष्ट प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार को नहीं रोकना और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच न होना अथवा भ्रष्टाचार को पकड़ के प्रधानमंत्री के खिलाफ एक्शन लिया जाना

सामान्य नागरिक, जो बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार से परेशान है, इन चुनावों के बाद उसे क्या मिलेगा?

बुनियादी सवाल यह है कि एक सामान्य नागरिक , जो बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार से परेशान है , इन चुनावों  के बाद उसे क्या मिलेगा ?  वह अपनी रोजाना की जि़ंदगी में स्कूल - अस्पताल , सड़क से लेकर हर सरकारी दफ्तर के भ्रष्ट कामकाज से दुखी है . ड्राईविंग लाईसेंस लेना हो या किसी दुकान या फैक्ट्री का लाईसेंस , बिना रिश्वत के नहीं मिलता . मकान की रजिस्ट्री से लेकर नक्शा पास कराने तक में फाईल बिना रिश्वत आगे नहीं बढ़ती . किसान की अच्छी खासी ज़मीन अगर किसी बड़े व्यापारी की नज़र चढ़ जाए तो रातों रात उसे छीनने की योजना सरकार बना देती है . इसके बाद जब किसान का बेटा कोई सरकारी नौकरी करना चाहता है तो उससे लाखों रुपए रिश्वत में ले लिए जाते हैं . इसलिए            सवाल यह नहीं है कि चुनाव नतीजों  में कौन  जीतेगा और कौन   हारेगा . सवाल तो यह है कि एक सामान्य आदमी की जि़ंदगी में कुछ बदलाव आएगा ? अगर नहीं ! तो   फिर यह चुनाव का नाटक किसलिए ?.

Jai Hind ...


DILIP JHA