बुनियादी सवाल यह है कि एक सामान्य नागरिक , जो बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार से परेशान है , इन चुनावों के बाद उसे क्या मिलेगा ? वह अपनी रोजाना की जि़ंदगी में स्कूल - अस्पताल , सड़क से लेकर हर सरकारी दफ्तर के भ्रष्ट कामकाज से दुखी है . ड्राईविंग लाईसेंस लेना हो या किसी दुकान या फैक्ट्री का लाईसेंस , बिना रिश्वत के नहीं मिलता . मकान की रजिस्ट्री से लेकर नक्शा पास कराने तक में फाईल बिना रिश्वत आगे नहीं बढ़ती . किसान की अच्छी खासी ज़मीन अगर किसी बड़े व्यापारी की नज़र चढ़ जाए तो रातों रात उसे छीनने की योजना सरकार बना देती है . इसके बाद जब किसान का बेटा कोई सरकारी नौकरी करना चाहता है तो उससे लाखों रुपए रिश्वत में ले लिए जाते हैं . इसलिए सवाल यह नहीं है कि चुनाव नतीजों में कौन जीतेगा और कौन हारेगा . सवाल तो यह है कि एक सामान्य आदमी की जि़ंदगी में कुछ बदलाव आएगा ? अगर नहीं ! तो फिर यह चुनाव का नाटक किसलिए ?.
Jai Hind ...
DILIP JHA
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